प्रस्तावना: भारत के हृदय की धड़कन
बिहार - यह नाम सुनते ही मन में एक ऐसी भूमि की छवि उभरती है जिसने न सिर्फ भारत बल्कि पूरी मानव सभ्यता को गहराई से प्रभावित किया है। यह वह भूमि है जहाँ विश्व को शांति और अहिंसा का संदेश देने वाले महान धर्मगुरुओं ने जन्म लिया, जहाँ विश्व के पहले लोकतंत्र की स्थापना हुई, और जहाँ भारत की सबसे शक्तिशाली साम्राज्यों ने जन्म लिया। आइए, इस पावन भूमि के इतिहास की यात्रा पर चलते हैं।
भाग 1: प्राचीन काल - सभ्यता का उदय (लगभग 600 ईसा पूर्व तक)
वैदिक काल और प्रारंभिक राज्य
बिहार का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। वैदिक काल में इस क्षेत्र को 'मगध' के नाम से जाना जाता था। ऋग्वेद में भी इस क्षेत्र का उल्लेख मिलता है।
विदेह साम्राज्य: मिथिला क्षेत्र में विदेह साम्राज्य फला-फूला, जिसकी राजधानी जनकपुर थी। यहाँ के राजा जनक और उनकी पुत्री सीता का उल्लेख रामायण में मिलता है।
मगध का उदय: छठवीं शताब्दी ईसा पूर्व में मगध एक शक्तिशाली राज्य के रूप में उभरा। इसकी पहली राजधानी राजगीर (तब राजगृह) थी।
जैन और बौद्ध धर्म का उदय
बिहार की सबसे बड़ी देन विश्व को दो महान धर्मों का उपहार है:
भगवान महावीर (599-527 ईसा पूर्व):
जन्म: कुंडग्राम, वैशाली
जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर
अहिंसा के सिद्धांत को मजबूती से स्थापित किया
गौतम बुद्ध (563-483 ईसा पूर्व):
जन्म: लुम्बिनी (वर्तमान नेपाल) में, लेकिन ज्ञान की प्राप्ति बोधगया, बिहार में
बौद्ध धर्म की स्थापना
महाबोधि मंदिर - यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
भाग 2: मौर्य साम्राज्य - भारत का स्वर्ण युग (322-185 ईसा पूर्व)
चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य
स्थापना: 322 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की
राजधानी: पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना)
चाणक्य का योगदान: अर्थशास्त्र के रचयिता और मुख्य सलाहकार
सम्राट अशोक (268-232 ईसा पूर्व)
मौर्य साम्राज्य का चरमोत्कर्ष अशोक के शासनकाल में हुआ:
कलिंग युद्ध (261 ईसा पूर्व): इस भीषण युद्ध के बाद अशोक ने युद्ध का परित्याग कर दिया
धर्म प्रचार: बौद्ध धर्म का विश्व भर में प्रसार
शिलालेख और स्तंभ: पूरे साम्राज्य में धर्म के सिद्धांतों को उत्कीर्ण करवाया
सिंह स्तंभ: सारनाथ का सिंह स्तंभ भारत का राष्ट्रीय चिन्ह बना
भाग 3: गुप्त साम्राज्य और शिक्षा का केंद्र (320-550 ईस्वी)
नालंदा विश्वविद्यालय - प्राचीन विश्व का सबसे बड़ा विद्यापीठ
स्थापना: गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम द्वारा 5वीं शताब्दी में
वैश्विक महत्व: चीन, कोरिया, जापान, तिब्बत, इंडोनेशिया से विद्यार्थी
शैक्षणिक संरचना:
8 विशाल भवन
300 कक्षाएं
10,000 छात्र और 2,000 शिक्षक
धर्मगंज पुस्तकालय - 9 मंजिला इमारत
विनाश: 1193 ई. में बख्तियार खिलजी द्वारा
विक्रमशिला विश्वविद्यालय
पाल वंश के शासक धर्मपाल द्वारा स्थापित
तंत्र बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र
भाग 4: मध्यकालीन युग - परिवर्तन और संघर्ष (1200-1757 ईस्वी)
शेर शाह सूरी (1486-1545)
जन्म: सासाराम, बिहार
प्रशासनिक सुधार:
रुपए का प्रचलन
ग्रैंड ट्रंक रोड का निर्माण
भूराजस्व व्यवस्था में सुधार
मुगल काल
बिहार मुगल साम्राज्य का एक सूबा बना
पटना व्यापार और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहा
भाग 5: ब्रिटिश काल और स्वतंत्रता संग्राम (1757-1947)
बक्सर का युद्ध (1764)
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की निर्णायक जीत
बिहार पर ब्रिटिश नियंत्रण की शुरुआत
1857 का स्वतंत्रता संग्राम
बाबू कुंवर सिंह: 80 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी
जगदीशपुर में वीरतापूर्ण संघर्ष
चंपारण सत्याग्रह (1917)
पृष्ठभूमि: नीलहे किसानों का शोषण
गांधी जी का आगमन: बिहार में गांधी जी की पहली सफल लड़ाई
परिणाम: चंपारण कृषि कानून, किसानों को राहत
महत्व: भारत में सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत
भाग 6: स्वतंत्रता के बाद का बिहार (1947 से अब तक)
राज्य का गठन
1912: बंगाल से अलग होकर बिहार राज्य का गठन
2000: झारखंड का बिहार से अलग होना
आर्थिक विकास
हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका
शिक्षा और तकनीकी के क्षेत्र में प्रगति
पर्यटन उद्योग का विकास
सांस्कृतिक विरासत
चित्रकला: मधुबनी पेंटिंग
लोक संगीत: विदेसिया, बिहू
साहित्य: मैथिली, भोजपुरी और मगही साहित्य
पर्व और उत्सव: छठ पूजा, सामा-चकेबा
भाग 7: बिहार के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल
पटना
गोलघर, पटना संग्रहालय, हरमंदिर तख्त
बोधगया
महाबोधि मंदिर, बोधि वृक्ष
नालंदा
नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष
राजगीर
विश्व शांति स्तूप, सप्तर्णी गुफाएं
वैशाली
अशोक स्तंभ, बुद्ध स्तूप
केशरिया
विश्व का सबसे ऊँचा बौद्ध स्तूप
निष्कर्ष: बिहार - अतीत का गौरव और भविष्य की आशा
बिहार का इतिहास मानव सभ्यता के विकास की एक जीवंत गाथा है। यह भूमि जहाँ एक ओर महावीर और बुद्ध जैसे महान आध्यात्मिक चिंतकों ने जन्म लिया, वहीं दूसरी ओर चंद्रगुप्त और अशोक जैसे महान सम्राटों ने विशाल साम्राज्यों पर शासन किया। नालंदा और विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों ने ज्ञान की ज्योत जलाई और चंपारण सत्याग्रह ने अहिंसक संघर्ष की नई इबारत लिखी।
आज का बिहार अपनी गौरवशाली परंपराओं को संजोए हुए नए युग की ओर अग्रसर है। इसकी यह यात्रा न केवल भारत बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।