Prashant Kishor: Are there possibilities of a new alternative in Bihar politics? प्रशांत किशोर: क्या बिहार की राजनीति में हैं एक नए विकल्प की संभावनाएं?

बिहार की राजनीति में एक नया नाम चर्चा में है - प्रशांत किशोर। जिस रणनीतिकार ने देश की सबसे बड़ी पार्टियों को चुनाव जिताने का फॉर्म्युला दिया, आज वही खुद बिहार की सड़कों पर मौजूद है। बिहार लंबे समय से विकल्प की तलाश में था - इसका सबूत है कि देश में सबसे ज्यादा NOTA का वोट 28% बिहार का ही रिकॉर्ड है। वहाँ के लोग RJD के डर से NDA को और NDA के डर से RJD को वोट देते आ रहे हैं। अब आज एक विकल्प आ गया है - जन सुराज जो शिक्षित लोगों को और नए लोगों को लेकर आया है राजनीति में, जिनकी फैमिली कभी नहीं थी। ये लोग समाज में प्रतिष्ठित और सामाजिक व्यक्ति हैं। लेकिन इस पर भी जातिवाद रुकने का नाम नहीं ले रहा।


प्रशांत किशोर की शुरुआत की गई नई पार्टी जन सुराज बिहार की राजनीति में एक नए विकल्प के रूप में उभर रही है। वे पारंपरिक जाति और पुरानी पार्टियों के राजनीतिक दबदबे को चुनौती देते हुए विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर केंद्रित कर रहे हैं। किशोर खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी पार्टी 243 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है और वे इसे बिहार में बदलाव की भूख का प्रतीक मानते हैं।

प्रशांत किशोर का दावा है कि बिहार की राजनीति पिछले 30-35 वर्षों से लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के दो बड़े राजनीतिक ध्रुवों के इर्द-गिर्द घूमती रही, जिसमें लोगों के पास कोई असली विकल्प नहीं था। जन सुराज पार्टी इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश कर रही है और मुख्य मुकाबला महागठबंधन या एनडीए से ही है। पार्टी का लक्ष्य बिहार में रोजगार, शिक्षा और विकास को बढ़ावा देना है, और वे जाति आधारित राजनीति को कम करने पर जोर देते हैं।

इस नयी राजनीतिक पहल को लेकर जनता में बदलाव की उम्मीद जगी है, जहां लोग पुराने नेताओं और पार्टियों के विकल्प की तलाश में हैं। हालांकि जन सुराज पार्टी का भविष्य कुछ हद तक अनिश्चित है, प्रशांत किशोर इस नए विकल्प की शक्ति पर भरोसा जताते हैं कि या तो यह बहुत सफल होगा या पूरी तरह संतुलन बिगाड़ देगा।

बिहार की राजनीति में एक नए विकल्प की संभावनाएं प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के माध्यम से मजबूत हो रही हैं, जो पारंपरिक दलों के लंबे समय के कब्जे को चुनौती दे रही है और विकास पर जोर देती है। किशोर की रणनीति के अनुसार, यह बदलाव बिहार राजनीति का नया अध्याय हो सकता है। लेकिन इस बार उनका सरकार बनना मुश्किल लग रहा है, लेकिन लोगों का मानना है कि वह इस बार वोट प्रतिशत और विधायक सीटों में बिहार की पहली या दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनेंगे।

Please Select Embedded Mode To Show The Comment System.*

Previous Post Next Post